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उस पात्र का जल २४ घण्टे बाद किसी वृक्ष पर चढ़ा दें। 

ऊँ ह्रीं श्रीं चामुण्डा सिंहवाहिनी बीसहस्ती भगवती रत्नमण्डित सोनन की माल ।

तेल, सुगन्ध, साबुन, पाउडर आदि का उपयोग न करें। 

उत्तर बांधों, दक्खिन बांधों, बांधों मरी मसान, डायन भूत के गुण बांधों, बांधों कुल परिवार, नाटक बांधों, चाटक बांधों, बांधों भुइयां वैताल, नजर गुजर देह बांधों, राम दुहाई फेरों।

गुरु की भूमिका:- शाबर मंत्रों की सिद्धि के लिए गुरु से दीक्षा लेना आवश्यक है। गुरु के निर्देशों का पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पालन करें।

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मंत्र सिद्ध होने पर क्या होता है : मं‍त्र से किसी देवी या देवता को साधा जाता है, मंत्र से किसी भूत या पिशाच को भी साधा जाता है और मं‍त्र से किसी यक्षिणी और यक्ष को भी साधा जाता है। मंत्र जब सिद्ध हो जाता है तो उक्त मंत्र को मात्र तीन बार पढ़ने पर संबंधित मंत्र से जुड़े देवी, देवता या अन्य कोई आपकी मदद के लिए उपस्थित हो जाते हैं। 

साधना रात्रि के शान्त वातावरण में करें। 

जानिए शाबर मंत्र पढ़ने के नियम, तांत्रिक परंपरा का हिस्सा है ये read more मंत्र  

उत्तरपथ में आप बठी, हाथ सिद्ध वाचा ऋद्धि-सिद्धि । धनधान्य देहि-देहि कुरु-कुरु स्वाहा ।।

ॐ मोसिद्धि गुरुपराय स्वीलिंग। महादेव की आज्ञा।

तंत्र मंत्र की उत्पत्ति के तौर पर हिंदू धर्म को जाना जाता है क्योंकि इस दुनिया का सबसे पहला धर्म हिंदू धर्म ही है और इसीलिए इस दुनिया में जो भी विद्या या फिर साधनाएं आई है उसकी उत्पत्ति हिंदू धर्म के द्वारा ही हुई है.

सिद्धि मंत्र

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